इंदौर, 22 अक्टूबर(खबरबाबा. कॉम)। निलंबन अवधि के आठ माह के वेतन के करीब 2 लाख 30 हजार रुपए के बिल पास कराने के बदले 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त इंदौर की टीम ने गुरुवार को ट्रैप कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, झाबुआ में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 पवन सिंह बिलवाल को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी जय नारायण बैरागी का नाम भी सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार, बैरागी ने अपने कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी बिलवाल के माध्यम से रिश्वत की राशि दिलवाई थी।
लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, शासकीय बालक छात्रावास, सेमलिया बड़ी, झाबुआ के अधीक्षक धूम सिंह पिता पुन सिंह सिंगाड़ ने लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी निलंबन अवधि के आठ माह के वेतन के लगभग 2.30 लाख रुपए के बिल पास कराने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ राजेश सहाय के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन कराया गया। शिकायत सही पाए जाने पर 22 अक्टूबर को आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 61(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर ट्रैप की योजना बनाई गई।
इसके बाद लोकायुक्त टीम ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, झाबुआ में कार्रवाई की। लोकायुक्त के मुताबिक, इस दौरान पवन सिंह बिलवाल को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इनकी रही भूमिका
लोकायुक्त इंदौर संभाग की इस कार्रवाई में निरीक्षक आशुतोष मिठास, प्रधान आरक्षक विजय एवं विवेक मिश्रा तथा आरक्षक आदित्य भदौरिया, कमलेश और पवन पटोरिया शामिल रहे।