रतलाम, 22 अक्टूबर (खबरबाबा.कॉम)। शहर के पुराने कलेक्टर कार्यालय परिसर में संचालित पुस्तकालय में रखी किताबें पाठकों के कितने काम आ रही हैं? क्या वर्षों से अलमारियों में बंद पुस्तकों को कोई पढ़ने के लिए इश्यू भी कराता है? गुरुवार को पुस्तकालय के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने ग्रंथपाल से यह सवाल पूछकर पुस्तकालय की उपयोगिता और पुस्तकों के रखरखाव पर ध्यान देने की जरूरत रेखांकित की। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्षों से इश्यू नहीं हुईं और पढ़ने योग्य नहीं बचीं पुस्तकों की समीक्षा की जाए तथा उनकी जगह नए संस्करणों के साथ साहित्यिक, प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यार्थियों के उपयोग की रुचिकर पुस्तकें रखी जाएं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पुस्तकालय केवल किताबें जमा करके रखने की जगह नहीं, बल्कि लोगों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने का माध्यम होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत वैशाली जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
किताबें अलमारियों में बंद न रहें, पाठकों के काम आएं
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अवलोकन किया। उन्होंने पुरानी साहित्यिक पुस्तकों के ऐसे संस्करण, जो अब पढ़ने योग्य नहीं रह गए हैं, उनके स्थान पर नए संस्करण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साहित्यिक पुस्तकों को अच्छी स्थिति में रखा जाए, ताकि पाठकों की रुचि बनी रहे। जिन पुस्तकों के कवर खराब हो चुके हैं, उन पर तत्काल नए कवर लगाए जाएं।
कलेक्टर ने ग्रंथपाल से यह भी पूछा कि लंबे समय से पुस्तकालय में रखी ऐसी पुस्तकों की उपयोगिता क्या है, जिन्हें वर्षों से किसी ने इश्यू तक नहीं कराया। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी पुस्तकों की सूची तैयार कर उनकी समीक्षा की जाए। पुस्तकालय में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, स्कूली बच्चों और साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों की जरूरत के अनुरूप नई पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं।
बच्चों के बीच बैठे कलेक्टर, पढ़ाई और करियर पर की चर्चा
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर कटेसरिया पुस्तकालय में पढ़ाई कर रहे बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ बैठकर बातचीत की। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे कौन-सी पुस्तक पढ़ रहे हैं और पुस्तकालय में पढ़ाई के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं होती। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य में करियर को लेकर उनकी योजनाओं की जानकारी भी ली।
इस दौरान उन्होंने पढ़ने की बदलती आदतों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले रील नहीं थी, तब लोग साहित्य पढ़ते थे। अब रील के दौर में लोगों के लिए पढ़ने की आदत बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में पुस्तकालयों को अधिक उपयोगी और रुचिकर बनाना जरूरी है, ताकि बच्चे और युवा पुस्तकों से जुड़ें।
गीता भवन में बनेगा आधुनिक पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी भी होगी
निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त अनिल भाना ने बताया कि कॉमर्स कॉलेज के पास ऑडिटोरियम परिसर में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से गीता भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
प्रस्तावित गीता भवन में सामान्य पुस्तकालय के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। वृद्धजनों के लिए भी पुस्तकों की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा ई-लाइब्रेरी और कैफेटेरिया की सुविधा भी प्रस्तावित है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सात दिन में हटेगा पुराना कचरा
कलेक्टर ने पुस्तकालय परिसर का निरीक्षण करते हुए नीचे रखे पुराने कचरे और अनुपयोगी सामग्री का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि खराब हो चुकी सामग्री और अनुपयोगी कचरे को सात दिवस के भीतर हटाया जाए। इसके साथ ही नियमानुसार विनष्टीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित कर पुस्तकालय परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखा जाए।