रतलाम,19अक्टूबर(खबरबाबा. कॉम)। अल्पवर्षा के चलते आगामी ग्रीष्मकाल में शहर पर जल संकट का खतरा मंडराने लगा है। धोलावाड़ बांध में भी अब तक लगभग 45 प्रतिशत जल संग्रहण होने की स्थिति में भविष्य की जरूरतों को लेकर अभी से गंभीरता बरतना जरूरी है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन की ओर से जल संरक्षण, पानी की बर्बादी रोकने और वैकल्पिक जल स्रोतों को विकसित करने के लिए कोई व्यापक पहल सामने नहीं आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नगर निगम को संकट आने का इंतजार करने के बजाय अभी से सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल शुरू कर देना चाहिए।
श्री डागा ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए शहर में मौजूद बोरिंग की वास्तविक स्थिति का आकलन, वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी का पुनः उपयोग और आमजन की भागीदारी से जल संरक्षण जैसे उपायों पर एक साथ काम करना होगा। इसके लिए नगर निगम को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर शासन से आवश्यक राशि की मांग भी करनी चाहिए।
बारिश कम होने के संकेत थे, फिर भी तैयारी क्यों नहीं?
पूर्व महापौर डागा ने कहा कि बारिश के मौसम से पहले ही अल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते कम वर्षा की आशंका जताई जा रही थी। ऐसी परिस्थितियों में नगर निगम को वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने, भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने और नागरिकों को बारिश की प्रत्येक बूंद सहेजने के लिए प्रेरित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर देने चाहिए थे। अब बारिश का मौसम बीत चुका है और अपेक्षाकृत कम वर्षा के कारण आगामी महीनों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
शहर की सभी बोरिंग का सत्यापन कराएं, मोटर-पंप की स्थिति भी जांचें
डागा ने सुझाव दिया कि नगर निगम के स्वामित्व वाली सभी बोरिंग का व्यापक सर्वे और भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कितनी बोरिंग चालू हैं, कितनी बंद हैं और किनकी जल उपलब्धता में कमी आई है। जिन बोरिंग से पानी मिल रहा है, उनकी जल क्षमता और वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाए। साथ ही, जहां आवश्यक हो, वहां तकनीकी जांच के बाद मोटर-पंप और अन्य जरूरी उपकरणों की व्यवस्था की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर इन स्रोतों का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि केवल बोरिंग की संख्या दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक बोरिंग की कार्यशील स्थिति, पानी की उपलब्धता और रखरखाव से संबंधित जानकारी का रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि आगामी गर्मी में किन क्षेत्रों में वैकल्पिक जल व्यवस्था की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, बोरिंग का उपयोग भूजल की उपलब्धता और तकनीकी व्यवहार्यता के आकलन के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित पानी का हो पुनः उपयोग
पूर्व महापौर ने शहर में जल संकट से निपटने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी के पुनः उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपचारित पानी को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार कर उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों और अन्य गैर-पेय उपयोगों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा सकती है।
इससे पेयजल की मांग पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है और बांध तथा भूजल जैसे स्रोतों पर निर्भरता घटाई जा सकती है। इसके लिए नगर निगम को ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता, प्रतिदिन उपलब्ध शोधित पानी की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और संभावित उपभोक्ताओं का आकलन करना चाहिए। जरूरत के अनुसार पाइपलाइन, भंडारण और वितरण की व्यवस्था विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना तैयार की जा सकती है। शोधित पानी का उपयोग संबंधित मानकों और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
पाइपलाइन लीकेज रोकें, पानी की बर्बादी पर हो कार्रवाई
डागा ने शहर में पानी की बर्बादी पर चिंता जताते हुए कहा कि कई बार पाइपलाइन से पानी व्यर्थ बहता रहता है, वहीं कुछ स्थानों पर नलों और टंकियों से पानी का अनावश्यक अपव्यय होता है। वाहन और सड़कें धोने में भी जरूरत से अधिक पानी खर्च किया जाता है। ऐसी स्थिति में नगर निगम को पाइपलाइन लीकेज की तत्काल मरम्मत, सार्वजनिक नलों की निगरानी और पानी की अनावश्यक खपत रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को भी समझना होगा कि जल संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय है। घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी बचाने के उपाय अपनाने के साथ ही वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना जरूरी है। पानी की बर्बादी के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जल संकट से निपटने की पूरी रूपरेखा बनाकर शासन से मांगें राशि
पूर्व महापौर डागा ने कहा कि नगर निगम को शहर के जल स्रोतों की स्थिति, आगामी महीनों की संभावित मांग और उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर एक समग्र कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। इसमें बोरिंग का सर्वे, खराब मोटर-पंप की मरम्मत, पाइपलाइन लीकेज रोकने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित पानी के पुनः उपयोग जैसे उपाय शामिल किए जाएं।
उन्होंने कहा कि जिन कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव तैयार कर शासन से आवश्यक राशि की मांग की जानी चाहिए। साथ ही, कार्यों की प्राथमिकता तय कर समयसीमा निर्धारित की जाए और उनकी नियमित समीक्षा हो। जल संकट से निपटने के लिए केवल बैठकों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम देने वाले कदम उठाने होंगे।
श्री डागा ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों के बेहतर उपयोग की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आगामी ग्रीष्म काल में शहर को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि वह अभी से सक्रिय होकर उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करे, पानी की बर्बादी रोके और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्ययोजना पर अमल शुरू करे।