रतलाम, 7 सितंबर (खबरबाबा.कॉम)। जमीन, कब्जे, सीमांकन, रास्ते और नामांतरण जैसे राजस्व विवादों से जुड़ी शिकायतों के निराकरण को लेकर कलेक्टर अजय कटेसरिया ने बड़ा फैसला लिया है। अब केवल पटवारी या राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद नहीं की जा सकेगी। शिकायत का फैसला करने से पहले राजस्व अभिलेखों की जांच, जरूरत पड़ने पर मौके का निरीक्षण और विवाद से जुड़े सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देना जरूरी होगा।
कलेक्टर ने साफ कहा है कि राजस्व मामलों में केवल शिकायतकर्ता की बात मानकर एकपक्षीय कार्रवाई नहीं की जाए। यदि शिकायत के निराकरण से किसी दूसरे व्यक्ति के स्वामित्व, कब्जे, भूमि की सीमा या अन्य अधिकार प्रभावित हो सकते हैं तो उस व्यक्ति को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देना होगा।
दरअसल, कलेक्टर के समक्ष ऐसे कई मामले आए, जिनमें शिकायतकर्ता ने शिकायत तो की, लेकिन जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता स्वयं अतिक्रमण की स्थिति में था या विवादित मामले में किसी तीसरे व्यक्ति का अधिकार और हित भी जुड़ा हुआ था। इसके बाद कलेक्टर ने अधिकारियों को राजस्व शिकायतों के निराकरण में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
नामांतरण से लेकर रास्ता विवाद तक नई व्यवस्था
सीएम हेल्पलाइन में नामांतरण, बंटवारा, निजी भूमि पर अवैध कब्जा, रास्ता विवाद, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और सीमांकन जैसी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचती हैं। अब इन मामलों में संबंधित राजस्व अधिकारी को खसरा, नक्शा, नामांतरण एवं बंटवारा आदेश, पूर्व सीमांकन अभिलेख सहित अन्य दस्तावेजों का परीक्षण करना होगा।जरूरत पड़ने पर मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति भी देखी जाएगी। इसके बाद ही शिकायत पर निर्णय लिया जाएगा।
कोर्ट में मामला चल रहा है तो शिकायत के जरिए नहीं होगा फैसला
कलेक्टर श्री कटेसरिया ने उन मामलों को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क किया है, जो पहले से सक्षम न्यायालय, कमिश्नर या सिविल कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सीएम हेल्पलाइन या अन्य माध्यमों से की गई शिकायत के आधार पर ऐसी एकपक्षीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिससे न्यायालयीन प्रक्रिया या किसी पक्ष के अधिकार प्रभावित हों।ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को उपलब्ध वैधानिक उपचार की जानकारी दी जाएगी।
पुराने आदेश का पालन नहीं हुआ तो शिकायत बंद नहीं होगी
कलेक्टर ने एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया है कि यदि किसी मामले में पहले आदेश पारित हो चुका है और नई शिकायत उस आदेश का पालन नहीं होने से जुड़ी है तो उसे केवल पुरानी या पुनरावृत्त शिकायत मानकर बंद नहीं किया जाएगा।
संबंधित अधिकारी को यह जांचना होगा कि पूर्व आदेश का वास्तव में पालन हुआ है या नहीं। पालन नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
जल्दबाजी नहीं, निष्पक्ष जांच के बाद फैसला
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राजस्व शिकायतों का निराकरण जल्दबाजी या केवल एक पक्ष की बात के आधार पर नहीं किया जाए। हर मामले में निष्पक्षता, पारदर्शिता, प्राकृतिक न्याय और कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए शिकायतकर्ता के साथ-साथ प्रभावित अन्य पक्षों के अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित की जाए।