रतलाम , 7 सितंबर(खबरबाबा. कॉम)।वर्तमान समय में साइबर अपराधों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए आमजन को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने, वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त करने तथा साइबर सुरक्षा संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश के प्रत्येक पुलिस थाने में “साइबर हेल्प डेस्क” संचालित की जा रही है।
इसी क्रम में एसपी अमित कुमार के निर्देशन में रतलाम जिले के सभी पुलिस थानों पर संचालित साइबर हेल्प डेस्क को और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार जिले के विभिन्न थानों में 19 नए प्रशिक्षित आरक्षकों की साइबर हेल्प डेस्क हेतु तैनाती की गई है।
ये नवप्रशिक्षित आरक्षक थाना स्तर पर पूर्व से कार्यरत प्रशिक्षित साइबर योद्धाओं के साथ मिलकर कार्य करेंगे। इससे साइबर अपराधों की शिकायतों पर प्रारंभिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई, तकनीकी समन्वय एवं आमजन को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होगी।
थाना स्तर पर आमजन को मिलेगी साइबर संबंधी सुविधाएं
साइबर हेल्प डेस्क का उद्देश्य आमजन को साइबर अपराध से संबंधित सहायता के लिए केवल जिला मुख्यालय अथवा साइबर सेल पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि अपने निकटतम पुलिस थाने पर ही प्रारंभिक सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
यह सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं
1. साइबर फ्रॉड की शिकायत में तत्काल सहायता– यदि किसी व्यक्ति के साथ UPI फ्रॉड, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, कार्ड फ्रॉड, OTP फ्रॉड, फिशिंग, निवेश के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड अथवा अन्य किसी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होती है तो साइबर हेल्प डेस्क द्वारा पीड़ित को तत्काल आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
पीड़ित को 1930 साइबर हेल्पलाइन एवं NCRP पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में सहायता की जाएगी तथा उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित बैंक/वित्तीय संस्था एवं अन्य एजेंसियों से समन्वय कर ठगी की राशि को होल्ड/फ्रीज कराने की कार्रवाई में सहायता की जाएगी।
2. ठगी की राशि को सुरक्षित कराने के लिए त्वरित समन्वय–वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। साइबर हेल्प डेस्क द्वारा पीड़ित से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर ट्रांजेक्शन विवरण, बैंक खाता, UTR/Transaction ID, मोबाइल नंबर एवं अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक प्रारंभिक कार्रवाई एवं संबंधित एजेंसियों से समन्वय किया जाएगा।
3. गुम या चोरी हुए मोबाइल की सहायता–
मोबाइल फोन गुम अथवा चोरी होने की स्थिति में साइबर हेल्प डेस्क द्वारा उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।CEIR सहित उपलब्ध तकनीकी संसाधनों एवं संबंधित पोर्टल की प्रक्रिया के संबंध में भी आमजन को आवश्यक जानकारी दी जाएगी, जिससे गुम मोबाइल की रिपोर्टिंग एवं उसे ब्लॉक/ट्रेस कराने की प्रक्रिया में सहायता मिल सके।
4. GRM एवं MRM पोर्टल संबंधी सहायता–
आमजन से संबंधित साइबर शिकायतों एवं अकाउंट अनफ्रीज आदि के निराकरण के लिए साइबर हेल्प डेस्क द्वारा GRM एवं MRM पोर्टल पर आवश्यक रिक्वेस्ट दर्ज करने एवं संबंधित प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
5. सोशल मीडिया एवं डिजिटल अपराधों में मार्गदर्शन–फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित अपराध, फिशिंग लिंक, संदिग्ध वेबसाइट, ऑनलाइन ठगी, डिजिटल धमकी, फर्जी विज्ञापन एवं अन्य साइबर अपराधों में पीड़ित को प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा तथा गंभीर मामलों को जिला साइबर सेल/साइबर थाना एवं वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाकर आवश्यक तकनीकी सहायता प्राप्त की जाएगी।
6. म्यूल अकाउंट एवं फर्जी सिम से संबंधित जानकारी–साइबर अपराधों में उपयोग होने वाले म्यूल बैंक अकाउंट, फर्जी बैंक खाते, संदिग्ध मोबाइल नंबर एवं फर्जी सिम से संबंधित जानकारी मिलने पर साइबर हेल्प डेस्क द्वारा उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक कार्रवाई एवं वरिष्ठ अधिकारियों/साइबर सेल से समन्वय किया जाएगा।
प्रशिक्षित साइबर योद्धाओं की टीम करेगी तकनीकी सहायता
थाना स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क में पदस्थ 19 नए प्रशिक्षित आरक्षक, पहले से कार्यरत प्रशिक्षित साइबर योद्धाओं के साथ मिलकर कार्य करेंगे।प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को साइबर शिकायतों की प्रारंभिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, बैंकिंग लेन-देन की जानकारी, मोबाइल एवं तकनीकी साक्ष्यों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई तथा साइबर शिकायतों को उचित माध्यम तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इस व्यवस्था से प्रत्येक थाने पर साइबर अपराधों के प्रति पुलिस की प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्षमता और अधिक प्रभावी होगी।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें 1930 पर कॉल
रतलाम पुलिस की आमजन से अपील है कि यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें तथा संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करें।साथ ही अपने निकटतम पुलिस थाने की साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क कर आवश्यक सहायता एवं मार्गदर्शन प्राप्त करें।